
राजस्थान सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 310 करोड़ रुपये की ‘जीरो डंपसाइट’ परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत प्रदेश के 152 नगरीय निकायों में वर्षों से जमा पुराने कचरे (लीगेसी वेस्ट) का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शहरों में बने कचरे के बड़े-बड़े ढेरों को समाप्त कर भूमि को दोबारा उपयोग के योग्य बनाना और आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना है।
परियोजना के अंतर्गत करीब 75 लाख घन मीटर पुराने कचरे का निस्तारण बायोमाइनिंग तकनीक से किया जाएगा। इस तकनीक में वर्षों से जमा कचरे को मशीनों की सहायता से अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है। पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है, जैविक अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाता है तथा अनुपयोगी अवशेषों का सुरक्षित निपटान किया जाता है। इससे खुले में पड़े कचरे से होने वाले प्रदूषण, दुर्गंध और भूजल प्रदूषण जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल पुराने डंपिंग स्थलों को हटाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में नए कचरे के पहाड़ बनने से रोकने के लिए वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणाली को भी सुदृढ़ करना है। इसके लिए कई शहरों में कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि अन्य नगरीय निकायों में निविदा और तकनीकी प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस पहल को राज्य के शहरों को ‘फ्यूचर-रेडी’ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त शहर न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होंगे, बल्कि पर्यटन, निवेश और शहरी विकास को भी नई गति देंगे। परियोजना पूरी होने के बाद डंपसाइट के रूप में उपयोग हो रही भूमि को सार्वजनिक सुविधाओं, हरित क्षेत्रों अथवा अन्य विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय सीमा में पूरी होती है तो इससे राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, भूमि के बेहतर उपयोग और टिकाऊ शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य के नागरिकों को लंबे समय तक इसका लाभ प्राप्त होगा।











